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‘‘चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। तुलसीदास चंदन घिसत और तिलक लैत रघुवीर।।’’

हनुमान जी की कृपा से गुसांई बाबा को चित्रकूट के घाट पर प्रभु के दर्शन होते हैंःगौरांग जी महाराज
UP Hathras11 जून, 18। चित्रकूट का घट है और गोस्वामी बाबा पथर की एक सिला पर चंदन घिर रहे हैं।
कथा प्रवचन करते व्यासपीठ गौरांग जी महाराज
इंतजार कर रहे हैं कि कब उनके स्वामी आएंगे और मिलन होगा। अचानक वहां पर दो सुकुमार आते हैं और तुलसीदास से चंदन की मांग करते हैं, लेकिन प्रभु मिलन की आस में वह दोनों ही सुकुमारों से चंदन की मना करते हैं। महावीर जो देख रहे थे पहचान गए कि अभी भी तुलसीदास स्वामी को नहीं पहचान रहे।
श्री रामदबार मंदिर में चल रही भक्तमाल
कथा श्रवण करते श्रद्धालुजन
कथा श्रवण करते बैंक अधिकारी
कथा के दौरान आचार्य गौरांग जी महाराज इस मार्मिक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि कहीं
फिर से तुलसीदास प्रभु दर्शन से न चूक जाएं। इसलिए पेड़ की एक डाल पर तोते का रूप धर कर हनुमान जी
कथा श्रवण करते सेवानिवृत्त रोडवेज अधिकारी
कहते हैं ‘‘चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। तुलसीदास चंदन घिसत और तिलक लैत रघुवीर।।’’ यह दोहा सुनते ही गोस्वामी तुलसीदास का ज्ञानतंत्र जाग्रित हुआ। ध्यान आया और फिर उनको प्रभु को पहचानने में देरी नहीं लगी। वह वेसुध हो गए और अपने प्रभु के चरणों में जा गिरे और प्रभु के चरणों को जकड़ लिया। प्रभु श्रीराघवेंद्र जी महाराज ने भी गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज को अपने ह्दय से लगा लिया।
इससे पूर्व गौरांग जी महाराज ने वह प्रसंग सुनाया जहां पर गोस्वामी बाबा को श्रीराम मिलन की आस जगी। वह प्रभु मिलन की आस में चित्रकूट पहुंचे और वहां पर गामदगिरी पर्वत की परिक्रमा लगाते और प्रभु का गुणगान करते। एक दिन प्रभु मिलन की आस में परिक्रमा के दौरान गुसांई बाबा ने देखा कि सामने से घेड़ों पर दो कुमार सवार होकर आ रहे हैं। एक श्याम और गौर वर्ण है। वह कुछ कहना भी चाहते हैं, लेकिन राजकुमार समझ कर और यह सोच कर कि वह शिकार पर आए होंगे। निकल जाते हैं, लेकिन प्रभु से मिलन न होने पर फिर से हनुमान जी का ध्यान करते हैं तो हनुमान जी बताते हैं, कि प्रभु तो आए थे, लेकिन तुम पहचान नहीं पाए। परेशान होते हैं, फिर से जब गंगाघाट पर चंदन लेने प्रभु आते हैं और तोता के रूप में हनुमान जी दोहा गाते हैं तो तुलसीदास जी को ज्ञान होता है गोस्वामी जी को प्रभु मिलन की प्राप्ति होती है।

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