सूर्यपाल आजाद व राजा मेंद्रप्रताप सिंह जैसे पत्रकारों की श्रम दान से ही मिली थी भारत को आजादी, श्रम जीवी पत्रिकारिता की रीढ़ है श्रम दिवस संजय दीक्षित PU (India) 01 May । पत्रिकारिता में भी श्रम प्रमुख स्थान रखता है। क्योंकि श्रम के बिना न कोई खबर निकलती है और न हीं खोज हो पाती है। अर्थात श्रम करने से ही सफलता के रास्ते खुलते हैं। वाकई यह सत्य है कि श्रमजीवी पत्रकारिता का दौर अब और वृहद होता जा रहा है। किसी भी खबर को वायरल करने के लिए श्रम तो आवश्य है ही। इसलिए श्रम दिवस पत्रिकारों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। श्रम जीवी पत्रिकारिता की देन है भारती की आजादीः- अरग पत्रकारों ने संर्घष नहीं किया होता तो आज भारत आजाद न होता। हमारे देश के स्व.सूर्यपाल आजाद, चंद्रपाल आजाद, जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह आदि सैकड़ों नहीं हजारों की संख्या में श्रमजीवी पत्रकारों ने अपने लहू से भारती की आजादी का इतिहास विश्व पटल पर लिख दिया था। आज हम जो आजादी की हवा में सांस ले रहे हैं वह इन श्रमजीवियों की ही देन है। श्रम दिवस की कहां सु हुई शुरूआतः- अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाने की शुरूआत 1...