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बिना ठोंके छक्का मारने वालों में आया महेंद्र, वीरेश और बल्टे का नाम, डिस्ट्रिक्ट बार चुनाव

बिना ठोंके छक्का मारने वालों में आया महेंद्र, वीरेश और बल्टे का नाम, डिस्ट्रिक्ट बार चुनाव
संजय दीक्षित
हाथरस 17 अप्रैल।  ‘बिना ठोंके ही मार दिया छक्का’ यह कहाबत है अपने मन की। गलत हो तो बता दो। गतल और सही क्या है पहले टॉपिक और उससे किससे संबंधित है। क्यों लिखा गया है? जी हां हम भी समझे हैं यह प्रश्न भी आपके मन में कौंध रहे होगे। बताते हैं, बताते हैं, हम बात डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के होने वाले चुनाव की कर रहे हैं।
कैसे उठा प्रश्न जानिएः-
बात जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में बने उन अधिवक्ता सीटों पर हो रही चर्चाओं की कर रहे है जहां से यह प्रश्न निकला। 17 अपै्रल, 18 दिन मंगलवार को कोर्ट परिसर में बने एक वरिष्ठ अधिवक्ता की सीट पर जब चुनावी चर्चा ने जोर पकड़ा तो कई मुद्दे उठ चले। जिसमें बार की आन, बान और शान को लेकर जो मुद्दा उठा तो लोग भी गंभीर होते दिखाई दिए। यहीं से बार पदाधिकारियों के कृतित्व और व्यक्तित्व पर जब बात हुई तो लगभग चुन कर बार कार्यकारिण में पहुंचने वाले अधिवक्ताओं में से उपाध्यक्ष के निर्विरोध निर्वाचन पर लोग संतुष्ठ दिखाई दिए और सुर भी उठे कि कम से कम एक अधिवक्ताअ का तो तय हो ही गया कि वह अधिवक्ता हित को लेकर बार और बैंच, शासन और प्रशासन के बीच  
अधिवक्ताओं की बात को रखने में सक्षम रहेगा। और फिर क्या था उपाध्यक्ष पद पर लगभग निर्वाचन तय होने की खुशी में सुनीलकांत शर्मा (बल्टे) एडवोकेट को बधाइयों मिलना शुरू हो गया। कुछेक ने तो फोन पर ही उन्हें बधाई दी। जबकि कुछ ने स्वयं पहुंचकर। जबकि चर्चाओं में यह चुटकी भी ली गई कि बिना ठोंके ही फिर जड़ दिया बल्टे भाई ने छक्का
यह भी हो चुके है निर्विरोध निर्वाचन में शामिलः-
विदित हो कि डिस्ट्रिक्ट बार ऐसोसिएशन के नामांकन-पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि तक दो पदों पर केवल एक-एक ही नामांकन किए जाने पर यह तो तय हो गया था कि उनका चुना जाना लगभग तय है। जिसमें कनिष्ठ उपाध्यक्ष प्रथम के लिए केवल महेंद्र सिंह दिवानिया व कनिष्ठ उपाध्यक्ष द्वितीय के लिए केवल वीरेश कुमार सारस्वत द्वारा ही नामांकन किया गया। कहानी में उस वक्त और इंट्रेस्ट आया जब कि अंतिम दौर में वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर एक मात्र राजेंद्र वर्मा के नामांकन के सामने अचानक सुनीलकांत शर्मा बल्टे एडवोकेट के अपना नामांकन-पत्र दाखिल कर दिया था। हालांकि नाम वापसी के अंतिम दिन जब श्री वर्मा जी द्वारा अपना नामांकन वापस ले लिया तो सभी ने उनकी सराहना की और श्री शर्मा को बधाई दी।

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