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मां अल्लाह के यहां गई और पिता गए कश्मीर, 13 वर्ष की आरसी को अब बालिका गृह कानपुर भेज रही है बालकल्याण समिति

मां अल्लाह के यहां गई और पिता गए कश्मीर, 13 वर्ष की आरसी को अब बालिका गृह कानपुर भेज रही है बालकल्याण समिति
संजय दीक्षित  (8630588789)
UP (India) 27 April । मां अल्लाह को प्यारी हो गई और पिता चला गया कश्मीर। वह अकेली दरगाह पर सोती थी और दिन में भीख मांग कर अपना जीवन काट रही थी 13 वर्ष की इस अवस्था में केवल उसको इतना ही याद था कि पिता ने जल्दी लौटने का वायदा किया था, लेकिन करीब छह साल बीत जाने के बाद भी पिता नहीं लौटा तो पिता को ढूंढ ने निकली इस बिटिया को आगरा पुलिस ने चाइल्डलाइन को सौंप दिया। हाथरस की बालकल्याण समिति को उसके परिजनों को ढूंढने में सफलता नहीं मिली है। उसे बालगृह बालिका कानपुर भेजे जाने तैयारी है। आप से गुजारिश है अगर आप जानते हैं पहचानते हैं तो कृपया हेल्प करें नीचे दिए नंबरों पर।
बेटी की जुवानी खुद की कहानीः-
नाम बताती है आरसी और कहती है कि मैं मुसलमान हूं। पिता का नाम साहिद है और वह मेरे लिए पैसा कमाने के लिए कश्मीर गए हैं। मरी मां करीब चार वर्ष पूर्ण ही अल्लाह के यहां चली गई। हाथरस के बस स्टैंड के पास एक दरगाह है। वहीं पर रात को सोती थी और दिन में भीख मांगती थी। आज मेरे पिता को कश्मीर गए हुए भी कई वर्ष बीत गए। मां है नहीं और पिता भी लौटे नही ंतो उन्हीं को तलाशी मैं यहां पहुंच गई। मैं नहीं जानती कि यह आगरा है। कश्मीर का रास्ता मिले तो वहां भी पहुंच जाउगी।
पुलिस ने सौंपा चाइल्डलाइन कोः-
जब आगरा में आवारा घुमते हुए बच्ची को देखा तो चर्चाओं में आई और सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को अपने साथ लेलिया। चूंकि मामला बालसंरक्षण का था। इसलिए पुलिस ने बच्ची को अरसी को चाइल्डलाइन को सौंप दिया। पूछताछ में बच्ची ने हाथरस का जिक्र किया तो चाइल्डलाइन वाले हाथरस ‘बालकल्याण समिति’  को सौंप गए।
क्या कहना है बालकल्याण समिति काः-
बालकल्याण समिति के मतेंद्र सिंह एडवोकेट ने बताया कि यह बच्ची आगरा की चाइल्डलाइन द्वारा सौंपी गई थी। बच्ची के मुताबिक हाथरस के बस स्टैंड़ के पास किसी दरगाह पर रहना बताया गया, लेकिन ऐसा कोई स्थान बच्ची नहीं पहचान पाई है। लगातार जब दर्जनों स्थानों पर भी बच्ची अपने रहने और परिजनों के संबंध में नहीं बताई तो यह निर्णय लिया गया है कि बच्ची को इंटरनल परीक्षण करा कर बालगृह बालिका कानपुर भेजा जा रहा है।
क्या सिस्टम है ऐसे बच्चों को संरक्षण प्रदान करने काः-
सरकार द्वारा ऐसे बच्चों के लिए यह सिस्टम बनाया है कि अगर ऐसा कोई बच्च पाया जाता है जो लाबारिश है तो उसको पुलिस चाइल्डलाइन को सौंपेगी। अगर फिर भी सफलता नहीं मिलती है तो चाइल्डलाइन संबंधित क्षेत्र के बालकल्याण समिति को सौंपेगी। बालकल्याण समिति बच्चे के परिवार के संबंध में जानकारी कर उसके परिवार के सुपुर्द करेगी। अगर किन्हीं करणों से बच्चे का परिवार नहीं मिलता है तो उसको बालगृह बालिका या बालक जो भी हो वहां भेजेगी।  बालगृह चार प्रकार के हैं। बालगृह बालक शून्य से दस वर्ष व 11 से लेकर 18 वर्ष से कम। इसी प्रकार बालगृह बालिका शून्य से 10 वर्ष और 11 से 18 वर्ष से कम।
हाथरस बालकल्याण समिति की अध्यक्ष ऋतुरानी अग्रवाल जिनका नंबर 9411852333 है। जबकि सदस्यों में मतेंद्र सिंह एडवोकेट जिनका नंबर 9319922592 है, नरेंद्र पचौरी का 9412459092 यह नंबर है और अतेंद्र घहलौत से इस नंबर पर 9992410127 संपर्क किया जा सकता है। कृपया आप पर ऐसी कोई सूचना है तो आप भी कर सकते हैं इस पुनीत कार्य का आरंभ।

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