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ज्वाला की क्रांति से भयभीत हो उठे थे अंग्रेज, अपनी करतूतों से कर दिया था गोरों की नाक में दम

ज्वाला की क्रांति से भयभीत हो उठे थे अंग्रेज, अपनी करतूतों से कर दिया था गोरों की नाक में दम

संजय दीक्षित
हाथरस 08 अपै्रल। सादाबाद के गांव सिखरा निवासी एक देश के पूत ने अंग्रेजों को नाकचना बिनावा दिया था। अंग्रेजों के अत्याचार और हर ओर से उठने वाली आजादी की आंधी के पुरोधा ज्वालाप्रसाद उर्फ भगवत प्रसाद रावत के सौर्य की अगर गाधा कहें तो भी छोटी पड़ती है। क्योंकि 14 वर्ष की अवस्था में ही आपने आजादी के युद्ध में अंग्रेजों के खिलाफ विगुल फूंक दिया था।
बात 1929 की है। उस वक्त पं.ज्यालाप्रसाद उर्फ भगवत प्रसाद रात जी सादाबाद के मिडिल स्कूल में अध्ययन करते थे। राष्ट््रपिता महात्मागांधी का उस वक्त ही सादाबाद में आगमन हुआ। गांधी जी के भाषणों को सुनने के बाद वह पूरी तरह से ओतप्रोत हो उठे और सबकुछ छोड़कर उन्होंने अपना उद्देश्य आजादी के मिशन को संपन्न कराने का बन गया। 1930 में उन्होंने जगह-जगह अपनी सभाएें की और अंग्रेजी शासन को लगान न देने का लोगों में संदेश दिया। यह देखकर अंग्रेज अफसर कुद्ध हुए और श्री रावत के साथ उनके साथी कल्याणदास व रामकरण जैन सहित तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। एक नंवबर, 30 को छह माह की सजा सुनाई और 50-50 रुपये का जुर्माना भी तीनों पर ठोंका गया।
जुर्माना अदा न करने पर अंग्रेजों ने आपके बैल व अन्य सामान को नीलाम कर जुर्माना वसूल कर लिया। 1932 में आपने अपने गांव लोधई में स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस मौके पर गांव के ही एक दबंग और अंग्रेजों के एक पिट्ठू ने अचानक हमला बोल दिया और इस मार में आपकी हड्डी टूट गई। जबकि अंग्रेजी पुलिस ने श्री रावत को गिरफ्तार कर लिया। 27 जनवरी, 32 को कमनपुर मुकाम पर आपको छह माह की जेल और 20 रुपये का जुर्माना किया गया। यहां पर मथुरा जेल से कैंप जेल लखनउ व बाद में हरदोई जेल भेज दिया गया। जहां पर उनको काफी मानसिक और शरीरिक यातनाएं दी गई। 1942 में फिर से पूरी तरह अंदोलित क्रियाओं को लेकर अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया। इस दौरान चमपेली गोली कांड में आपके गोली लगी और जख्मी हो गए।

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