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यह कैसा न्याय, हद में रहकर परशुराम शोभायात्रा भी अपराध एक नहीं दौ सो विप्रों पर मामला, मंत्री जी के समक्ष गुहार

यह कैसा न्याय, हद में रहकर परशुराम शोभायात्रा भी अपराध एक नहीं दौ सो विप्रों पर मामला, मंत्री जी के समक्ष गुहार 
UP (India) 01 May। वाकई वह वक्त मन को कचौटने वाला था जब मंत्री जी के सामने इंस्पेक्टर का एक समर्थक सफाई दे बैठा। उग्रता को पैदा होनी ही थी। क्योंकि भगवान परशुराम की शोभायात्रा निकालना इतना बड़ा अपराध हो गया कि एक नहीं एक दर्जन नहीं सौ नहीं दो सौ से भी अधिक विप्र बंधुओं के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करा दिया गया। उस पर भी दिल में बड़ी टीस पैदा हुई कि ऐसे इंस्पेक्टर की पैरवी करने वाला कोई और वह भी उसी समाज से था जिनके खिलाफ अकारण मामला दर्ज कराया गया है।
यह वेदना विप्र समाज के नगर अध्यक्ष प्रशांत शर्मा की थी। पूरे मामले का अध्ययन किया जाए तो वेदना गलत नहीं थी। क्योंकि जैसा कि बताया जा रहा है कि 100 मीटर की परमीशन दी गई थी और सौ मीटर शोभायात्रा निकालने के बाद उसका समापन कर दिया गया, लेकिन फिर भी रिपोर्ट दर्ज करा कर इंस्पेक्टर ने ऐसा क्या प्रमाण दिया कि अपराध पर अंकुश लग गया। क्या यही कारगुजारी है खाकी की। नहीं इंस्पेक्टर भी एक इंसान हैं। अंतर इतना है कि शायद वर्दी के बाद जो सोच होनी चाहिए शांति और सद्भाव पैदा कराने की शादय वह नहीं थी। एक प्रमाण के तौर पर कहें तो अलीगढ़ के एसएस पी जो अभी हाल ही में मेरठ के लिए स्तानांतरित हुए हैं। अलीगढ़ जैसे क्षेत्र में शांति और सद्भाव का माहौल जगा गए, बिना कुछ किए केवल मृदुभाषण और सद्व्यवहार से। अब नही ंतो आगे सही हम भी इंस्पेक्टर ऐसी ही कामना करेंगे कि यदि इनको किसी क्षेत्र का भी चार्ज मिले तो वह भी जनता के सहयोग से क्षेत्र में शांति और सद्भावना फैलाएं, नाकि राजनीतिक भाव से किसी भी समाज और व्यवस्था को विखंडित करने की कोशिश करें।

हालांकि प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी ने सभी विप्र समाज को आस्वासन दिया कि जल्द के मामले में निष्पक्ष जांच करा कर इसका निस्तारण करा दिया जाएगा। इस मौके पर प्रशांत शर्मा, रामनिवास रावत, विक्रम रावत, शिवदेव दीक्षित, रूपेश उपाध्याय, अविनाश तिवारी, ब्रजलाल शर्मा, सुमित शर्मा, भूपेंद्र शर्मा, दिनेशचंद्र शर्मा, राजकुमार शर्मा, भारत पाठक, योगेंद्र शर्मा, रामप्रकाश आदि विप्रबंधु मौजूद थे।

रिपोटिंग

नवीन कुमार वार्ष्णेय

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