Skip to main content

बच्चों की खुशियां व बड़ों के मनोरंज में मना श्वान का जन्मदिन

बच्चों की खुशियां व बड़ों के मनोरंज में मना श्वान का जन्मदिन
हाथरस 20 अप्रैल। स्टैफी ने जैसे ही अपनी तीसरे साल में कदम रखा वसुंधरा के बच्चों में उत्साह और आनंद का संचार हो चला। यह तो एक बहाना था और भी क्यों ना। क्योंकि बच्चे तो किसी भी बात में अपनी खुशियां ढूंढ लेते हैं।
शायद आप समझ पाए हों या नहीं, लेकिन हम बता देते हैं कि स्टैफी उस जीव का नाम है जिसको संस्कृत में श्वान, हिन्दी में कुत्ता और इंगलिश में डॉग कहते हैं। बतादें कि यूपी के हाथरस जिले में शहर के बीच से पश्चिम दिशा की ओर मुरसान गेट यानि मथुरा रोड स्थित वसुंधरा कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार में बचपन से पल कर बड़ी हुई स्टैफी ने अपने 19 अप्रैल, 18 को अपने तीन वर्ष पूर्ण कर लिए।
‘तुक्मतासीर सौह-बते-असरः-(जैसा देखेंगे, वैसा सीखेंगे) ठीक इसी तर्ज पर बच्चे भी कूऐ जैसी आवाज होते हैं। मतलब कहने का यह है कि शहर की एक प्रतिष्ठत कॉलोनी वसुंंधरा में अच्छे परिवार और फैमलियां रहते हैं। इतनी बड़ी कॉलोनी में अक्सर किसी न किसी बात को लेकर पार्टियां का आयोजन होता ही रहता है। यह सब बच्चे भी देखते हैं। इसी का परिणाम था कि बच्चे कभी किसी भी में भेदभाव नहीं करते और उन्होंने अपनी खुशी ढूंढली साथ ही बड़ों को भी को भी हंसियों का मौका दे दिया।
इस मौके पर बच्चों ने केक काटा, गुब्बाड़े फोड़े, तितलियां उड़ाई और जमकर मिष्ठान्न का वितरण कर छोटे और बड़ों के साथ मिलकर जमकर इंजोय किया।
इस मौके पर मनन वार्ष्णेय, निमिषा वार्ष्णेय, आकांक्षा, तान्या, गुंजन, यमन, आदेश, हैरी, प्रणव, अनन्या, आरुष, सोहमी, साक्षी आदि दर्जनों बच्चों ने इस कार्यक्रम में सहभागिता कर खुशियों को लूटा।

रिपोटिंग

नवीन कुमार वार्ष्णेय

Comments

Popular posts from this blog

‘‘चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। तुलसीदास चंदन घिसत और तिलक लैत रघुवीर।।’’

हनुमान जी की कृपा से गुसांई बाबा को चित्रकूट के घाट पर प्रभु के दर्शन होते हैंःगौरांग जी महाराज UP Hathras11 जून, 18। चित्रकूट का घट है और गोस्वामी बाबा पथर की एक सिला पर चंदन घिर रहे हैं। कथा प्रवचन करते व्यासपीठ गौरांग जी महाराज इंतजार कर रहे हैं कि कब उनके स्वामी आएंगे और मिलन होगा। अचानक वहां पर दो सुकुमार आते हैं और तुलसीदास से चंदन की मांग करते हैं, लेकिन प्रभु मिलन की आस में वह दोनों ही सुकुमारों से चंदन की मना करते हैं। महावीर जो देख रहे थे पहचान गए कि अभी भी तुलसीदास स्वामी को नहीं पहचान रहे। श्री रामदबार मंदिर में चल रही भक्तमाल कथा श्रवण करते श्रद्धालुजन कथा श्रवण करते बैंक अधिकारी कथा के दौरान आचार्य गौरांग जी महाराज इस मार्मिक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि कहीं फिर से तुलसीदास प्रभु दर्शन से न चूक जाएं। इसलिए पेड़ की एक डाल पर तोते का रूप धर कर हनुमान जी कथा श्रवण करते सेवानिवृत्त रोडवेज अधिकारी कहते हैं ‘‘चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। तुलसीदास चंदन घिसत और तिलक लैत रघुवीर।।’’ यह दोहा सुनते ही गोस्वामी तुलसीदास का ज्ञानतंत्र जाग्रित हुआ। ध...

बिजली चोरों को भनक भी नहीं लगी, मध्य रात्रि में पहुंच गई विजलेंस टीम, 34 बिजली चोरों के खिलाफ हुई रिपोर्ट दर्ज

बिजली चोरों को भनक भी नहीं लगी, मध्य रात्रि में पहुंच गई विजलेंस टीम, 34 बिजली चोरों के खिलाफ हुई रिपोर्ट दर्ज  UP (India) 11 May। गुरुवार की रात में चेंकंग करती विजलेंस टीम सभी सो रहे थे और टीम चेकिंग में मशगूल थी। चोरों को भी यह पता नहीं था कि उनकी पोल खुलने रही है और फिर क्या था। रात को जब चकिंग समाप्त हुई तो विद्युत चोरों के पास उनकी चोरी का परिणाम था। टीम ने हाथरस शहर के अंदर कई क्षेत्रों में की गई छापेमारी में 34 विद्युत चोरों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। सावधान! अगर आपकी विद्युत चोरी की प्रवृत्ति बन चुकी है तो छोड़ दो। अगर आपके अंदर लोभ का वास है और विद्युत की चोरी कर कुछ पैसे बचाना चाहते तो उस लोभ को छोड़ दो। क्योंकि यह लोग आपके लिए काफी मंहगा साबित होने वाला है। पूछो क्यों ? क्योंकि चोरी करोगे तो एक बार की छापेमारी में आपका दिवाला निकल कर सामने आ जाएगा। कारण चोरी करोगे कुछ दिन, लेकिन पैसा पूरो वर्षभर का देना पड़ेगा। मतलब हजारों का जुर्माना। कहने का मतलब है कि सरकार की सख्ती वैसे ही नहीं है। इसलिए ही सख्ती है कि लोगों पर ज्यादा लोड़ न पड़े और लोग अधिक लोड़ से बच सकें...

हाथरस की यह मजबूरी सिर्फ 35 किमी की दूरी

हाथरस की यह मजबूरी सिर्फ 35 किमी की दूरी -बाहरी प्रत्याशियों का दंश झेलता आ रहा है हाथरस -1984 तक कांगे्रस पर महरवान रही हाथरस की तनजा तो 1991 से भाजपा के प्रत्याशी को ही चुन कर संसद भेज रही जनता  संजय दीक्षित हाथरस। ‘‘अरे हाय हाय ये मजबूरी ये मौसम और ये दूरी, मुझ पल पल है तड़फाये एक दिना......’’ फिल्म ‘‘रोटी कपड़ा और मकान’’ के गाने के यह बोल लोकसभा हाथरस पर भी सटीक बैठते हैं। क्योंकि क्षेत्र की समस्या व लोगों की पीड़ा के निराकरण को अब तक हुए लोकतंत्र के 17 समरों को प्रतिनिधित्व 17 में 12 वार वाहरी लोगों को सौंपा गया है। मजे की बात तो यह है कि यह 18 लोकतंत्र के इस यज्ञ में 18 वीं वार भी आहूतियां देने के लिए लोकल प्रत्याशियों का पूर्णतः अभाव दिखाई दे रहा है। हाथरस के प्रथम सांसद नरदेव स्नातक को दुर्लभ चित्र यह हाथरस की पीड़ा ही कही जा जा सकती है कि लोकसभा के लिए यहां के मतदाताओं को अब तक 17 वार हुए मतदान में 12 वार वाहरी प्रत्याशियों को सांसद बनाकर लोकसभा भेजा है। लोगों के बोलों से निकली बातों पर जाएं तो यह सबसे बड़ी पीड़ा है कि हर विधानसभा और लोकसभा का एक अलग-अलग भौगो...