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पूरे भारत के साथ हाथरस में भी ऐतिहासिक बंद, कई संगठनों ने घंटाघर पर दिया एससी/एसटी के विरोध में ज्ञापन

पूरे भारत के साथ हाथरस में भी ऐतिहासिक बंद, कई संगठनों ने घंटाघर पर दिया एससी/एसटी के विरोध में ज्ञापन
पंजाबी मार्केट, हाथरस
06 सितंबर, 18। एससी/एसटी को लेकर आज एक मंच पर दिखाई दिया भारत। हर शहर और हर कस्बे में ऐतिहासिक बंद प्रदर्शन से यह ही सिद्ध होता है कि निश्चित ही सरकार ने कोर्ट के फेसले को चेलेंज कर गलत किया है।
जीहा! हम बात एससी/एसटी काले कानून के विरोध में पूरे भारत बंद के आह्वाहन के बाद रही बाजार बंदी ऐतिहासिक रही। अर्थात यह कहावत सिद्ध होती है कि ‘‘राम से और गाम से किसी की न
जिला एवं सत्र न्यायालय, हाथरस पर एससी/एससी
 एक्ट का विरोध करते अधिवक्तागण
बसियावे’’ अर्थात प्रभु और पब्लिक से जिसने भी टक्कर ली है उसने हमेसा मौखी खाई है। गुरुवार को पूरे भारत से जो खबरें और चित्र और चलचित्र देखने को मिले उससे तो बंद ऐतिहासिक दिखा और इससे यह होता दिखाई दे रहा है कि आरक्षण, एससी/एसटी एक्ट आदि को लेकर पूरे भारत की पब्लिक एकमत हो चली है। और हो भी क्यों नहीं क्योंकि इससे जो परिणाम निकल कर सामने आ रहे हैं उससे देश के विकास पर प्रश्न चिन्ह लग कर रह गया है।
इन काले कानूनों के चलते प्रतिभा पर प्रतिबंध
रामलीला ग्राउंड पर काली पट्टी लेकर
विरोध-प्रदर्शन करते सवर्ण संगठन के सदस्य
सा लग कर रह गया है। जो आईएस में हर हाल में स्थान पाने वाला है उसको कहीं पर चपरासी की भी जॉब नहीं हैं। जो व्यापार में पैना है, उसको व्यापार के लिए इतने प्रतिबंध यानि सरकारी औपचारिकताएं कर दी गई हैं कि न वह व्यापार कर सकता है और ना हीं उसको कहीं जॉब है परिणाम उल्टे ही होने वाले हैं। जब अधिकारों का हनन होता है और अत्याचार बढ़ते हैं तो अंत में विरोध पर तो लोग उतरते ही हैं।
बंद पड़ी मंडीसमिति की तमाम दुकानें
हाथरस में भी कुछ ऐसा ही रहा। सुबह से ही बाजार बंदी को लेकर शहर की 70 प्रतिशत से ज्यादा लनता एक मत थी। देर दूपहर बाद बाजारों में कहीं रौनक दिखाई दी। अन्यथा बाजार ऐतिहासिक बंदी की श्रेणी में दर्ज हो गया। जबकि गल्ला व्यापारियों, राष्टवादी पार्टी, बृह्मणों की कई संस्थाओं के अलावा राजपूत आदि संगठनों ने नगर के घंटाघर पर सीओ को इस संबंध में ज्ञापन सौंप पर अपना विरोध दर्ज कराया।

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