Skip to main content

अनिल के दिमाग में है कविताओं का कंप्यूटर

अनिल के दिमाग में है कविताओं का कंप्यूटर
-तीन शब्द बोला और तत्काल तैयार हो जाती है कविता
कवि संगम के कार्यकर्ता अनिल बौहरे का स्वागत करते हुए
संजय दीक्षित
हाथरस। कोई लिखता है, कोई वकता है, लेकिन यहां पर तो आप कोई भी तीन शब्द या अक्षर बताइए और तत्काल ओज की धारा में हास्य, व्यंग्य ओर वीर रस से सनी कविता पाइए। ‘‘ब्रज की द्वार देहरी’’ की इस मूरत को भले ही आज लोग न समझें, लेकिन यह तो निश्चित है कि इतिहास लिखने वाली इस शख्सीयत को साहित्य के समंदर में आने वाली पीढ़ियां सम्मान के साथ याद करेंगी।
जीहां! हम बात ‘‘हाथरस की हस्ती’’ आशु कवि अनिल बौहरे के संबंध में कर रहे हैं। जो हास्य-व्यंग्य के आका कवि काका व ओज के महाअंश बाबा निर्भयानंद के सानिध्य में साहित्य की सरगम पर सवार हो काव्य के मार्ग पर चल पड़े थे और अभी भी अनवरत चल रहे हैं। अगर यह कहा जाए कि वह भी काका और निर्भय की परंपराओं को आगे बढ़ाने में साहित्य सौंदर्य बढ़ा रहे हैं तो गलत नहीं होगा।

आशु कवि अनिल बौहरे
 झूला झूलते हुए
बौहरे की विशेष कलाः- अगर बात अनिल बोहरे की विशेषता की करें तो उनके द्वारा तत्काल कविता बनाने की जो कला है वह उनको ओज की ओर ले जाते हुए आपने आपमें एक विशेष स्थान पर ले जाती है। वह किसी से भी कोई तीन शब्द या तीन अक्षर पूछते हैं। बस बिना लिखे और बिना किसी बिलंभ के उनकी कविता चंद मिनटों में आपके सामने
होती है। यह ही नहीं उनकी कविता में कमाल का कमेंट्स होता है। मसलन कभी व्यंग्य तो कभी हास्य का ऐसा पुट होता है कि अनिल बोहरे को साहित्य में एक अलग स्थान दिलाता है।
पूरे हिन्दुस्तान में अपनी विधा की करा चुके हैं पहचानः-अनिल बौहरे अपने कविता पाठ का कश्मीर से कन्याकुमारी तक परिचम लहराचुके हैं। बौहरे ने उत्तर प्रदेश के अलावा तमिलनायडु, पांडुचेरी, आंधप्रदेश करर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, बिहार आदि राज्यों के सैकड़ों शहरों में काव्यपाठ कर लोगों को आल्लाहित किया है।
      काव्यपाठ प्रथम मंच रहा था दाऊजी मेलाः-भले ही अनिल बौहरे भारत के कौने-कौने में साहित्य का समरस बिखेरचुके हों, लेकिन उनकी काव्य विधा का आरंभ ब्रज की द्वार देहरी हाथरस नगरी का प्रसिद्ध लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ही रहा है। यह ही नहीं उनके संयोजनकत्व में करीब 8

आशु कवि अनिल बौहरे पद्मश्री नीरव जी के साथ कबर पेज पर
बार हाथरस में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ है। अखिल भारतीय ब्रजभाषा कवि सम्मेलन के भी वह अनेकों बार संयोजक रहे। जबकि मेला श्रीदाऊजी महाराज में कवियत्री सम्मेलन और जनपदीय कवि सम्मेलन की शुरूआत स्वयं उन्होंने ही कराई। इन कार्यक्रमों को शुरू कराने का उनका मुख्य उद्देश्य था कि हाथरस और प्रतिभाओं को मौका मिल सके। बौहरे जी एक बार मेला श्रीदाऊजी महाराज के संयुक्त रिसीवर भी रह चुके हैं।
बेरोजगारी पर तमाचा है हर्बलधारा। बिना लागत, बिना
 किसी रिस्का बिजनेस। प्रोड्क्ट्स शुद्धता की गारंटी।
तंबाकू परिवार में हुआ था जन्मः-हाथरस के समाजसेवी बौहरे जवाहरलाल शर्मा तंबाकूवालों के यहां पर 24 अगस्त, 1951 में अनिल शर्मा का जन्म हुआ था। वह शुरू से ही कुशाग्र बुद्धि और साहित्य के प्रति समर्पित थे। काका और निर्भय जी के अधिक निकट रहने के कारण ओज जैसी कहा में हास्य-व्यंग्य सराबोर रचनाएं उनकी एक अलग पहचान बनी हुई हैं। साहित्य के इस अद्भुत हस्ताक्षर के लिए द्वार की देहरी प्रमुदित होती है।

Comments

Popular posts from this blog

‘‘चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। तुलसीदास चंदन घिसत और तिलक लैत रघुवीर।।’’

हनुमान जी की कृपा से गुसांई बाबा को चित्रकूट के घाट पर प्रभु के दर्शन होते हैंःगौरांग जी महाराज UP Hathras11 जून, 18। चित्रकूट का घट है और गोस्वामी बाबा पथर की एक सिला पर चंदन घिर रहे हैं। कथा प्रवचन करते व्यासपीठ गौरांग जी महाराज इंतजार कर रहे हैं कि कब उनके स्वामी आएंगे और मिलन होगा। अचानक वहां पर दो सुकुमार आते हैं और तुलसीदास से चंदन की मांग करते हैं, लेकिन प्रभु मिलन की आस में वह दोनों ही सुकुमारों से चंदन की मना करते हैं। महावीर जो देख रहे थे पहचान गए कि अभी भी तुलसीदास स्वामी को नहीं पहचान रहे। श्री रामदबार मंदिर में चल रही भक्तमाल कथा श्रवण करते श्रद्धालुजन कथा श्रवण करते बैंक अधिकारी कथा के दौरान आचार्य गौरांग जी महाराज इस मार्मिक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि कहीं फिर से तुलसीदास प्रभु दर्शन से न चूक जाएं। इसलिए पेड़ की एक डाल पर तोते का रूप धर कर हनुमान जी कथा श्रवण करते सेवानिवृत्त रोडवेज अधिकारी कहते हैं ‘‘चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। तुलसीदास चंदन घिसत और तिलक लैत रघुवीर।।’’ यह दोहा सुनते ही गोस्वामी तुलसीदास का ज्ञानतंत्र जाग्रित हुआ। ध...

हर दिन डेढ सजा का लक्ष्य किया तय

हर दिन सुनाई गई डेढ़ सजा - पुलिस के साथ अभियोजन ने 716 आरोपियों को सुनाई सजा - पूरे साल में 556 मामलों में सुनाई गई सजा - बकौल एसपी चिरंजीव नाथ सिंहा, आगे और बहतर करने का होगा प्रयाश हाथरस। पुलिस ने अभियोजन के साथ मिलकर 360 दिन में 556 सजाओं के माध्यम से 716आरोपियों को अभियुक्त सिद्ध कर के जेल का रास्ता दिखाया है। अगर यह कहा जाए कि हर दिन पुलिस और अभियोजन ने मिल कर डेढ़ सजा का आंकड़ा तय किया है तो गलत नहीं होगा क्योंकि साल में 360 दिन होते हैं और सजा 556 सुनाई गई है।इससे सीधा-सीधा आंकड़ा निकलता है एक दिन में डेढ़ सजा का मापदंड तप किया गया है।हालांकि यह आंकड़ा इतना अच्छा भी नहीं है, मगर आने वाले दिनों में इसको और सुधारा जा सकता है। बीते समय से सबक लेने की आवश्यकता है कि कहां पर चूक हुई है।क्योंकि कहीं ना कहीं पुलिस गवाहों के होस्टाइल होने के कारण ही आरोपी कोअभियुक्त सिद्ध नहीं कर पाती और वह सजा से वंचित रह जाते हैं ।इसलिए यह कहना फक्र की बात है कि पुलिस ने मेहनत करते हुए हर दिन एक से ज्यादा सजा का लक्ष्य तय किया है इधर, अभियोजन ने भी रात दिन एक करते हुए अपने कार्य को अंजाम द...

यतेंद्र की खैर में मेहनत डा० चारू की बनी है सफलता की ढाल

खैर (अलीगढ़ा)। धार्मिक उन्माद और आपसी भाईचारा के बीच द्वंद में बतौर अखाड़ा बने खैर में आपसी भाईचार भारी दिखाई दे रहा है। 15 नवंबर को टप्पल रोड  पर हुई मा० अखिलेश जी की जनसभा से बनक बदलते नजर आये हैं। चुनाव प्रचार में लगे ठाकुर यतेंद प्रताप सिंह राना व पूर्व MLC ठा० उदयवीर सिंह की मेहनत रंग लाती दिखाई दे रही है।         ठा० यतेंद प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी के जमीनी सिपाही की तरह रहे हैं। यही करण के कि मा० अखिलेश यादव ने उन्हें खैर में विजय पताका फैराने के लिए नैया का खैवइया के रूप में चुना है। सबकुछ ठीक रहा ते डा० चरुकैन यहां से जनप्रति निधि होंगी और ठा० यतेंद्र प्रताप की मैहनत सफल होगी। 15 नवंबर की सफल सभा के बाद ठा० यतेंद्र प्रताप अपने काफिल के साथ पुनः प्रचार मैदान में हैं और सफलता के संग सभी का साथ थामें सदन की तैयारी में जुट गये हैं। 16 नवंबर को भी ठा० यतेंद्र प्रताप ने गांव - गांव व क्षेत्र में सघन संपर्क अभियान चलाया है। 🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🌹🌹🌹🌹🪷🪷 Dr. Charu's hard work for Yatendra's welfare has become the shield of suc...