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*महिला शसक्तिकरण के लिए विधिक ज्ञान भी जरूरी*

ब्लाॅक सासनी में विधिक साक्षरता शिविर का हुआ आयोजन

हाथरस। ब्लॉक सासनी में एक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में बृहस्पतिवार को महिला शसक्तिकरण के लिए एक विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन प्राधिकरण के सचिव सुशील कुमार सिंह सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग की अध्यक्षता में हुआ।
          जिसमें श्रीमती मोनिका गौतम, जिला महिला कल्याण अधिकारी, हाथरस व डीके सिंह, जिला प्रोवेशन अधिकारी, एके मिश्र, परियोजना निदेशक, हाथरस व मौहम्मद आजम श्रम प्रवर्तन अधिकारी, जितेन्द्र पाल सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, सासनी व सूचना अधिकारी  डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, हाथरस अधिवक्ता  देवेश दीक्षित आदि के अलाव लिपिक  जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विष्णु शर्मा उपस्थिति थे।
        इस मौके पर वक्ताओं ने महिलाओं को उनके अधिकारों एंव मौलिक अधिकारों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर बताया गया कि हमारे देश में महिला सशक्तिकरण के लिए कई सारी योजनाएँ चलाई जाती हैं। इनमें से कई सारी योजनाएँ रोजगार, कृषि और स्वास्थ्य जैसी चीजों से सम्बंधित होती हैं। इन योजनाओं का गठन भारतीय महिलाओं के परिस्थिति को देखते हुए किया गया है। ताकि समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ाया जा सके। इनमें से कुछ मुख्य योजनाएँ मनरेगा, सर्व शिक्षा अभियान, जननी सुरक्षा योजना (मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए चलायी जाने वाली योजना) आदि हैं। भारतीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए योजनाएँ इस आशा के साथ चलाई जा रही है कि एक दिन भारतीय समाज में महिलाओं को पुरुषों की ही तरह प्रत्येक अवसर का लाभ प्राप्त होगा। यह योजना कन्या भ्रूण हत्या और कन्या शिक्षा को ध्यान में रखकर बनायी गयी है। इसके अंतर्गत लड़कियों के बेहतरी के लिए योजना बनाकर और उन्हें आर्थिक सहायता देकर उनके परिवार में फैली भ्रांति लड़की एक बोझ है की सोच को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को 24 घंटे इमरजेंसी सहायता सेवा प्रदान की जाती है, महिलाएँ अपने विरुद्ध होने वाली किसी तरह की भी हिंसा या अपराध की शिकायत इस योजना के तहत निर्धारित नंबर पर कर सकती हैं। इस योजना के तरत पूरे देश भर में 181 नंबर को डायल करके महिलाएँ अपनी शिकायतें दर्ज करा सकती हैं। उज्जवला योजना महिलाओं की तस्करी और यौन शोषण से बचाने के लिए शुरू की गई है। इसके साथ ही इसके अंतर्गत उनके पुनर्वास और कल्याण के लिए भी कार्य किया जाता है। कानूनी अधिकार के साथ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कुछ अधिनियम पास किए गए हैं। वे अधिनियम - अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956, दहेज रोक अधिनियम 1961, एक बराबर पारिश्रमिक एक्ट 1976, मेडिकल टर्म्नेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1987, लिंग परीक्षण तकनीक एक्ट 1994, बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2006, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण एक्ट 2013 आदि अधिनियम बनाये गये है। इसके अतिरिक्त उन्होंने विवाह एंव तलाक, भरण-पोषण, न्यायिक पृथक्करण एंव सम्पत्ति में 
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महिलाओं के कानूनी अधिकारों के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी देते हुये बताया कि प्रत्येक महिला को अपने पति से भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होनें कहा कि महिलाओं की किसी भी समस्या के लिये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव तत्पर  है।

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