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18 भी दिन पर अध्यक्ष मौन आमरण अनशन पर

अधिवक्ताओं के मान-सम्मान की लड़ाई में अब आर या पार
-18 वें दिन भी अध्यक्ष अजय रहे मौन आमरण पर
- सोमवार से जिला जज की कोर्ट में कार्य ना करने के निर्णय पर एकजुटता की मोहर
हाथरस। 2023 में सर्व हित में 23 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार 18 वें दिन भी डिस्ट्रिक्ट बार के अध्यक्ष अनशन पर रहे। इस पर एकजुट हुए अधिवक्ता समाज ने सोमवार से जिला जज के न्यायालय में न्यायिक कार्य ना करने का निर्णय लिया।
        विदित हो डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय भारद्वाज अधिवक्ता व वादकारियों के हितार्थ मौन आमरण अनशन पर हैं। शुक्रवार को 18 वें दिन भी उनका अनशन जारी रहा। वह 23 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अप्रैल से मौन आमरण अनशन पर हैं। शुक्रवार को हुई डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की सर्व मान्य अधिवक्ता समाज की बैठक में प्रत्याशी सदस्य बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश रामसनेही यादव ने भी अपनी उपस्थित दर्ज कर इस 23 सूत्रीय मांग को लेकर अनशन का समर्थन किया। बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष चंद्रमोहन ऋषि व संचालन महासचिव पवन शर्मा ने किया। साथ ही अधिवक्ताओं ने विचार व्यक्त करते हुए जिला न्यायालय परिसर हाथरस में फैली अव्यवस्थाओं पर असंतोष जाहिर किया और अध्यक्ष अजय कुमार भारद्वाज की बिगड़ती हुई तबीयत को लेकर चिंता व्यक्त की।
इस अवसर पर भोलू शर्मा, मनीष कौशल, विनीत शर्मा, हरिओम शर्मा, लक्ष्मीनारायण, बाबू सिंह जादौन, बृजेश नागर, रामवीर सिंह दादू, अशोक शर्मा, प्रवीण चौधरी उर्फ पिंटू, राकेश शर्मा, लक्ष्मीकांत सारस्वत, वीरेंद्र चौधरी, अजय शर्मा, विनोद शर्मा उर्फ बंटी, भागीरथ शर्मा, विनय कौशिक, बालकिशन उपाध्याय, विश्वास सारस्वत आदि भी ने मौन आमरण अनशन में सहभागिता की।
 इस बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास हुआ कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश हाथरस मृदुला कुमार द्वारा सत्येंद्र अंटील बनाम सीबीआई के संदर्भ में पारित उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन न करने, उच्च न्यायालय के सर्कुलर व दिशा-निर्देशों का इस संदर्भ में पालन न किए जाने पर चिंता जताई और जानकारी दी कि उच्चतम न्यायालय के सत्येंद्र बनाम अंटील के मामले में हाथरस का नाम उच्चतम न्यायालय द्वारा अंकित किया गया था, बावजूद इसके जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा सत्येंद्र बनाम अंटील की रूलिंग का अनुपालन न किये जाने पर खेद जताया। साथ ही यह डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन हाथरस ने यह निर्णय लिया कि सोमवार 8 मई से जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में न्यायिक कार्य नहीं करेंगे।

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