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क्षत्रिय शिरोमणि शोभायात्रा भी बनी ब्रज द्वार के सर्वधर्म संभाव का हिस्सा

-दूसरे इतिहास की तैयारियों में आयोजकों ने रखी 9 मई की तारीख
संजय दीक्षित
क्षत्रिय महासभा द्वारा जारी पोस्टर
UP ( India) 02 May यूपी का जिला हाथरस जिसको ब्रज का द्वार कहा जाता है। जो मां हाथुरसी (मां पार्वती) का विश्राम स्थल है। जो मेला और दशहराओं की परंपराओं को पूर्व काल से बरकरार बनाए हुए हैं। अपनी इस परंपरा में एक और इजाफा किया है। विगत वर्ष से आरंभ हुई क्षत्रिय शिरोमणि महापुरष शोभायात्रा दूसरे वर्ष भी अपने इतिहास को दौराने के के कगार पर है। इसके लिए आयोजकों ने जोरशोर से तैयारियों को अंतिम रूप भी दे दिया है।
ब्रज की द्वार देहरी का इतिहास ही बड़ा निराला है। अगर यूं कहा जाए कि रस की नगरी ‘हाथरस’ सर्वधर्म संभाव का केंद्र है तो गलत नहीं होगा। क्योंकि पूर्व में 1902 का इतिहास उठाकर देखें तो एक ओर भगवान बलभद्र का उत्सव मेला और दूसरी ओर बाबा कालेखां की मजार पर सालाना उर्स का प्रोगराम एक सर्वधर्म संभाव का प्रतीक है। इसी प्रकार वर्तमान में यह शहर जुलु-से-मोहम्मदी मियां भाइयों के सालाना उत्सव को तरजीह देता है तो नगर में निकलने वाली अन्य सभी जाति और धर्मों की शोभायात्राओं को भी सम्मानित ढंग से देखता आ रहा है।
हाथरस के इतिहास में क्षत्रिय शिरोमणि महापुरष शोभायात्रा एक नया अध्यायः-

यह कहने में नेक भी झिझक नहीं होनी चाहिए कि हाथरस के सर्वधर्म संभाव में जो थोड़ी सी कमी थी वह भी क्षत्रिय समाज ने बीते वर्ष से पूर्ण कर दी है। क्योंकि हाथरस में निकलने वाले मेले और दशहरों में क्षत्रिय समाज की शोभायात्रा की कमी थी जो पूर्ण हो गई। इस वार मतेंद्र सिंह घहलौत एडवोकेट सदस्य डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस वार भी क्षत्रिय शिरोमणि महापुरुष शोभायात्रा 9 मई को अपना दूसरा इतिहास रचने जा रही है। श्री गहलौत के मुताबिक यह शोभायात्रा गोशाला मार्ग से आरंभ होकर नगर में भ्रमण के लिए निकलेगी। शोभायात्रा का स्थान-स्थान पर अन्य समाजों द्वारा स्वागत सम्मान भी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि शोभयात्रा की सारी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। 

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