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नवीन के प्रश्नों पर लड़खड़ाई बबिता, एससी/एसटीएक्ट सदन का निर्णय, गलत नहीं होने दिया जाएगा किसी के साथ

नवीन के प्रश्नों पर लड़खड़ाई बबिता, एससी/एसटीएक्ट सदन का निर्णय, गलत नहीं होने दिया जाएगा किसी के साथ
भाजपा महिला मोर्चा की ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष
हाथरस 12 अगस्त। आपको तो पता ही है कि एससी/एसटी एक्ट के संबंध में लाए गए कानून को लेकर आमजन में आक्रोश है। इस आक्रोश के चलते भाजपा के ज्यादातर पदाधिकारियों और सरकार में बैठे मंत्रियों पर भी जबाव नहीं बन रहा है। ऐसा की कुछ रविवार को हाथरस में हुआ।
बतादें कि यहां मथुरा रोड पर भाजपा के कैंप कार्यालय पर आगरा से ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा की बबिता चौहान पार्टी संगठन की बैठक लेने आई थीं। इस मौके पर कार्यक्रम को कबर करने पहुंचे नवीन कुमार वार्ष्णेय ने जब उनसे एससी/एसटी एक्ट के विरोध में देश में उठ रहे स्वरों के संबंध में जबाव मांगा तो वह पहले तो झिझक गई। हालांकि उन्होंने बाद में निडरता के साथ अनुशासन की ढाल बनाकर उत्तर भी दिए। 
01. नवीन ने पूछा कि मेडम राम मंदिर का मुद्दा इतना गंभीर है कि उस पर भी सदन में बैठकर निर्णय लिया जा सकता था, लेकिन ऐसी क्या मजबूरी हुई कि कोर्ट के आदेश को भी दरकिनार करते हुए सदन में बिना जांच के ही गिरफ्तारी जैसे गंभीर मुद्दे पर निर्णय लेने की आवश्यता पड़ गई।
02. उत्तर देखिए हम पार्टी के अनुशासन में बंधे हैं। इसलिए इस विषय पर कुछ ज्यादा नहीं कर सकते। हमारे प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी काफी योग्य हैं और देश और समाज के हित में जो उचित लगा है उन्होंने निर्णय लिया है। रही बात मंदिर मसले की तो उस पर भी जल्द ही सहमति से निर्णय ले लिया जाएगा।
03. नवीनः-क्या एससी/एसटी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी से देश में उठ रहे विरोध से पार्टी के वोट बैंक पर असर नहीं पड़ेगा।
04. उत्तर देखिए देश की जनता काफी समझदार है। वह समझती है कि पूर्व की सरकारों ने क्या किया है और अब देश की आर्थिक स्थति कितनी बेहतर हुई है। जो निर्णय लिए जा रहे हैं वह जनहित के ही हैं। भाजपा सदैव जनहित और देश के हित में कार्यकरती आई है और आगे भी करते रहेगी।
05. नवीनः-मेरा कहना यह है कि क्या इतने कठोर निर्णयों से जनता में गलत संदेश नहीं जाएगा। क्या इससे सत्ता के रास्ते में कांटे पैदा नहीं होंगे।
06. उत्तर देखिए मैने फिर कहा कि निर्णय वो लेते हैं जिनको सत्ता का लोभ नहीं होता। उन्हें सिर्फ देश और समाज की बेहतरी की चिंता होता है। जो निर्णय लिया गया है उचित ही होगा। रही किसी के अहित की बात तो वह किसी के साथ होने नहीं दिया जाएगा।

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