मां के आंचल को बेच रहे भूमाफिया, मातृदिवस के मौके पर उठाई लोगों ने मांग, माफियाओं से बचाओ भूमि मां को, अन्यथा बेचडालेंगे श्मशान की भिम को भूमाफियाओं द्वारा कब्जाने के विरोध में प्रदर्शन करते सर्व समाज के लोग UP (Hathras) 13 May। देख तेरे संसार कर हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान कितना बदल गया इंसान.... इस फिल्मी गाने के सार पर जाएं तो बिल्कुल वही हो रहा है कि बदले इंसान को यह भी पता नहीं कि जिस भूमि को वह कब्जाना चाहता है वह उसकी मां है। बात मां की हो रही है तो क्योंना यह भी डिस्कस कर लें कि मां और उसका हमारे जीवन में क्या औचित्य है। आज मातृ दिवस है और मां के रौल पर चार्चा होना भी लाजमी है। सुना तो ऐसा है कि जब प्राणी इस संसार में आता है तो मां की कोख होती है। जब इस संसार में आता है तो मां की गोद होती है और जब इस संसार से विदा होता है तो मां यानि धरती मां की गोद में अंतिम सांस लेता है। कुल मिलाकर मां से कभी उनंतर नहीं हो पाता प्राणी, लेकिन मौका लगने पर यह खुदगर्ज मां के आंचल तक को बेचने में गुरेज नहीं करता। मोक्षदायी भूमि यानि श्मशान की भूमि को बेच रहे भू...